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मुझे फिर से बॉर्डर पर जाना हैं रिश्ता लौट शर्तों हिस्सा मुकाम औरतों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं बैरोजगारी भूखमरी बढ़ रही हैं न्याय व्यवस्था डगमगा गई हैं जवानी में रोमांस हैं बैवफाई पर ग़म हैं प्यार परवान चढ़ा हों तो खुशी समझने के लिए बहुत कुछ हैं पर कोई समझना नहीं चाहता.....

Hindi शर्तों पर जिए हैं Poems